नमस्कार दोस्तों

Deepika Chikhalia
रामायण सीरियल की सीता का संक्षिप्त जीवन परिचय

फोटो सीता

हमारे हिन्दी आर्टिकल में आप सभी का बहुत बहुत स्वागत है।आप सभी का प्यार मेरा मनोबल बढा़ता है। आज के इस रोचक और अविस्मरणीय जानकारी में दीपिका चिखलिया जी का यात्रा वृतांत लेके हाजिर हूं उम्मीद है आप सभी को पसंद आयेगा।


 

     रामानंद सागर की लोकप्रिय टीवी धारावाहिक ‘रामायण’ में सीता का किरदार निभा चुकीं दीपिका चिखलिया को एक आदर्शवादी महिला किरदार के लिए पहचाना जाता है। उस समय  सीता के रूप में घर-घर में लोग इनकी पूजा करते थे। हर घर में अपनी खास जगह बनाई। करोड़ों दिलों में दीपिका की छवि अब भी सीता के रूप में बनी हुई है।


दीपिका चिखलिया ने मात्र  15-16 की आयु में ही सीता के किरदार को पर्दे पर इस तरह निभाया  कि लोग उन्हें कहीं भी देखते तो  उनके हाथ श्रद्धा से प्रणाम के लिए उठ जाते। मेले हाट में राम सीता के रूप में फोटो भी बिकने लगा था। उस समय हम बच्चे तो मेले से राम  सीता की फोटो खरीद के उन्हीं की पूजा करते थे।


अपने अभिनय  रुचि के बारे में दीपिका चिखलिया का कहना है, कि रामलीला देखने के बाद ही उनके अंदर अभिनय का शौक जगा। उसके बाद कई फिल्मों में किरदार निभाया। परंतु लोग तो उनकी पूजा करते थे क्योंकि लोगों के दिमाग में उनकी सीता की छवि जो बस चुकी थी।

दीपिका का जन्म 29 अप्रैल, 1965 में हुआ। वह अभिनेत्री होने के साथ-साथ राजनीतिज्ञ भी हैं। दीपिका चिखलिया ने एक कॉस्मैटिक कंपनी के मालिक हेमंत टोपीवाला से शादी की, जिसके बाद उनका नाम दीपिका चिखलिया से बदलकर दीपिका टोपीवाला हो गया। फिलहाल, दीपिका इसी कंपनी की रिसर्च और मार्केटिंग टीम की हेड  हैं।

इनकी  कंपनी श्रृंगार  बिंदी और टिप्स एंड टोज नेलपॉलिश बनाती है। उनकी दो बेटियां हैं। निधि टोपीवाला और जूही टोपीवाला। दोनों अभी पढ़ाई कर रही हैं। दीपिका की बेटियां जब स्कूल में होती हैं, तब दीपिका दफ्तर में होती है। बच्चों  के साथ  शाम को वह बखूबी मां  के किरदार में आ जाती हैं।

दीपिका फिलहाल अभिनय क्षेत्र में लौटना नहीं चाहती हैं। हालांकि उन्हें आज भी धार्मिक किरदारों के लिए आफर आतेे  है। लेकिन कंपनी और घरेलू काम में व्यस्त होने के चलते वह इसके लिए हामी नहीं भर सकतीं।


दीपिका ने 1983 में ‘सुन मेरी लैला’ के साथ मनोरंजन-जगत में अपने सफल करियर की शुरुआत की थी, इसमें उन्होंने राज किरण के साथ काम किया। इसके बाद उन्होंने राजेश खन्ना के साथ 3 हिंदी फिल्मों में काम किया। उन्होंने मलयालम, तमिल, बांग्ला फिल्मों के भी जाने-माने कलाकारों के साथ काम किया।

उन्होंने 1983 में ‘फिल्म सुन मेरी लैला’, 1985 में ‘पत्थर’, 1986 में ‘चीख’, 1986 में ‘भगवान दादा’, 1986 में ‘घर संसार’, 1987 में ‘रात के अंधेरे’, 1986 में ‘घर के चिराग’, 1991 में ‘रुपया दस करोड़’, 1994 में ‘खुदाई’ जैसी हिंदी फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने मलयालम, कन्नड़, भोजपुरी, तेलुगू, तमिल, बंगाली फिल्मों में भी बेहतरीन प्रस्तुतियां दी हैं।

फिल्मी दुनिया में अपनी किस्मत आजमा चुकीं दीपिका ने कई बी-ग्रेड फिल्मों में अभिनय किया, जिसमें उन्होंने बेहद बोल्ड दृश्य भी दिए। यहां तक कि एक फिल्म में उन्होंने न्यूड सीन फिल्माने में भी कोई संकोच नहीं किया।


परन्तु रामायण में सीता का किरदार निभाने क के बाद दीपिका ने अपने अभिनय करियर में ऐसे दृश्यों से तौबा कर लिया। और सीता के छवि में ही अपने आप को उचित समझा।

‘रामायण’ में अरुण गोविल ने राम का किरदार निभाया था और सीता दीपिका चिखलिया बनी थीं। नटराज स्टूडियो में एक फिल्म के ऑडिशन के दौरान रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर ने दीपिका को देखते ही सीता के किरदार के लिए चुन लिया था।

‘राम-सीता’ की इस जोड़ी को उस समय इस बात का तनिक भी अहसास नहीं था कि वह इतिहास रचने जा रहे हैं। ‘रामायण’ की शूटिंग को मात्र छह महीने बीते थे कि वह इतने लोकप्रिय हो गए कि वे खुद को स्टार मानने लगे।

फोटो राम सीता
‘रामायण’ का प्रसारण टेलीविजन चैनल दूरदर्शन पर 25 जनवरी, 1987 से 31 जुलाई, 1988 तक हर रविवार सुबह 9.30 बजे किया जाता रहा। वो ऐसा समय था, जब टीवी सेट रखा कमरा किसी धार्मिक स्थल में तब्दील हो जाता था
और हर रविवार सुबह लोग ‘रामायण’ देखने के लिए आतुर रहतेे थे। हमारे  गाँव में इका दूका किसी के घर टी वी हुआ करती थी। पुरा गाँव इकट्ठा हो जाता था। कई बार तो भीड़ के चलते गाँव में तख्त भी टूट जाता।
उसी समय से ‘रामायण’ में राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल की छवि लोगों के बीच एक आदर्शवादी पुरुष के समान हो गई थी और सीता का किरदार निभाने वाली दीपिका को भी लोग  सम्मान देते थे। राम और सीता का किरदार निभाने वाले इन दोनों कलाकारों को लोग काफी सम्मानजनक दृष्टि से देखते थे।

‘रामायण’ के राम और सीता यानी अरुण गोविल और दीपिका को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी सम्मानित किया था। उन्हें हर जगह पहचान मिली। ‘रामायण’ को भले ही तीन दशक बीत चुके हों, लेकिन दीपिका चिखलिया आज भी सीता के रूप में ही घर-घर में पहचानी जाती है।


                  धन्यवाद पाठकों
                  कृष्णावती कुमारी

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