- Advertisement -
HomeMythologyजाने माता सती ने आत्मदाह क्यों किया

जाने माता सती ने आत्मदाह क्यों किया

माता सती ने आत्मदाह क्यों किया|Story of maata sati suicide

जाने माता सती ने आत्मदाह क्यों किया-जाने माता सती ने आत्मदाह क्यों किया- विवाह के उपरांत भगवान शिव सती को लेकर अपने निवास स्थान कैलाश पर्वत लौट आए। उनका वैवाहिक जीवन सुख पूर्वक व्यतित हो रहा था। लेकिन प्रश्न उठता है कि माता  सती ने आत्म दाह क्यों किया ?

एक दिन भगवान शिव ने सती से कहाः ” प्रयाग के ऋषि-मुनि एक भव्य एवं विशाल यज्ञ का आयोजन कर रहे है।इस यज्ञ में बड़े-बड़े ऋषि-मुनि ,तपस्वी एवं सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया है। यदि हम दोनों भी वहां पर जाएं तो अति उत्तम होगा। क्या तुम मेरे साथ वहां चलोगी? “हाँ देव! आपके साथ मैं आवश्य चलूँगी। “सती ने कहा। भगवान शिव और सती अपने सेवक-सेविकाओं के साथ यज्ञ में पहुंचे।

उनके सम्मान में वहां सभी ऋषि मुनि एवं देवता खड़े हो गए और झुककर उनका अभिवादन किया। इसके बाद सती और शिव अपने लिए आरक्षित स्थान पर जाकर बैठ गए। कुछ देर बाद दक्ष ने परवेश किया। एक बार सभी दक्ष के सम्मान में खड़े हो गए। परन्तु शिवजी अपने स्थान पर बैठे रहे। वे जानते थे कि यदि वह शिर झुका कर दक्ष को प्रणाम किया तो उन्हें हानि हो सकती है। लेकिन दक्ष को यह अपमान लगा।

उन्होंने मन ही मन सोचा, ‘ मेरे दामाद को छोड़कर बाकी सभी मेरे सम्मान में खड़े हो गए। बस वही अपने स्थान पर बैठा रहा। उसकी इतनी हिम्मत की वह मेरा अपमान करे। अपने आप को सर्व शक्तिमान समझ रहा है।मैं उसेआवश्य सबक सिखाऊँगा ।’ यज्ञ समाप्त होते ही दक्ष अपने घर लौट आए। फिर उन्होंने शिव से बदला लेने के लिए एक रूप रेखा तैयार किया।

दक्ष द्वारा विशाल यज्ञ क्यों किया गया ?

दक्ष ने निर्णय लिया कि मैं एक विशाल यज्ञ का आयोजन करूंगा और ‘ब्रह्मा विष्णु ‘ को उसका दायित्व सौंपूंगा।मैं यज्ञ में तीनों लोकों के निवासियों को आमंत्रित करूंगा। सिर्फ अपने असभ्य दामाद और पुत्री को छोड़कर। उन दोनों को आमंत्रित नहीं करके अपने अपमान का बदला ले लूँगा। दक्ष ने जल्दी ही यज्ञ की सारी तैयारियाँ कर लीं। साथ ही उनके दूतों ने तीनों लोकों के अतिथियों को आमंत्रण दे दिया।

अतिथियों के बैठने के लिए एक विशाल शिविर भी लगाया गया। एक दिन सती कैलाश पर्वत पर बैठी हुई थीं। तब उन्होंने देखा कि अनेक सुसज्जित रथ एक विशेष दिशा की ओर जा रहे हैं। यह देखकर उनके मन में यह तीव्र इच्छा हुई कि आखिर ये सारे रथ कहाँ जा रहे हैं। उन्होंने अपनी एक सेविका से इस विषय में पूछा तो उसने कहा कि वह इस रहस्य का भेद पता कर उन्हें बताएगी।
सेविका ने पता किया तो पता चला कि “दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया है। जिसमें तीनों लोकों के निवासियों को बुलाया गया है। सभी वहीं जा रहे हैं। जब सेविका ने सती को बताया तो यह सुनकर आश्चर्यचकित रह गईं। सती ने सोचा, शायद मेरे पिता तीनों लोकों के निवासियों को आमंत्रित करने में हमें यानि बेटी दामाद को भूल गए होंगे। यह सोचकर सती तुरंत शिव के पास गईं और बोली, ” हे स्वामी आप मुझे मेरे पिता के यज्ञ मंडप में तुरंत लेकर चलें।

Story of maata sati suicide

उन्होंने सबको बुलाया, परंतु हमें ना जानें कैसे भूल गए। ” भगवान शिव ने कहा, “देवी, आपके पिता दक्ष मुझे पसंद नहीं करते । वे मुझे असभ्य मानते हैं। शायद इसीलिए उन्होंने हमें नहीं बुलाया। ” लेकिन सती कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थीं। वे अपनी जिद्द पर अडिग रहीं। अतः शिव ने उनके जिद्द के सामने झुक कर कहा, ठीक है। यदि आपकी वहां जाने की हार्दिक इच्छा है तो नंदी आपको वहां ले जाएंगे। परंतु मैं वहां नहीं जाऊंगा।

आप वहाँ जाकर सम्मिलित होइए। फिर वे सती को चेतावनी देते हुए बोले, “एक बात का ख्याल रखेंगी, आपके पिता हमारा कितना भी अपमान करें, परंतु आप धैर्यपूर्वक उनकी बातों को सुनियेगा। कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त करियेगा। ” जी,मैं आप की बातों का ध्यान रखूंगी। फिर वह नंदी पर बैठ कर अपने पिता के घर चली गई। वहां पहुंच कर अपने पिता के पास गई तो उन्होंने अनदेखी कर दी। उन्होंने सती की तरफ देखा ही नहीं I

सती का अपमान क्यों किए उनके पिता दक्ष?

तब वह अपने पिता से बोलीं, पिताजी आप ने हमें और हमारे पति को यज्ञ में आमंत्रित क्यों नहीं किया ? परन्तु दक्ष ने कोई जबाव नहीं दिया। कोई जवाब न पाकर सती ब्रह्मा और विष्णु के तरफ मुड़कर बोलीं, “आप दोनों ने ही तो हमारा विवाह कराने में सहायता की थी। फिर आप कैसे मेरे आराध्य का अपमान सहन कर सकते ?”तब दक्ष ने क्रोध पूर्वक कहा, “सती बहुत हो गया” तुम्हारा ये अविवेकपूर्ण आचरण! जब तुम्हें बुलाया ही नहीं गया, तो तुम यहाँ क्यों चली आई ?

तुम यहाँ रुकना चाहती हो तो रुको वर्ना चली जाओ। मैंने तुम्हें आमंत्रण पत्र भेजकर नहीं बुलाया है। तुम्हारा पति असभ्य है। वह बुरी और दुष्ट आत्माओं का स्वामी है। इस शुभ अवसर पर उस भभूत धारी की उपस्थिति का कोई औचित्य नहीं है। वह तो श्मशान में डेरा डाले रहता है। मैंने तुम्हारा विवाह मात्र इस कारण किया, क्योंकि मेरे पिता ने कहा था। अन्यथा मैं तुम्हारा विवाह उससे कभी नहीं करता ।

मुझे तो वह तनिक भी पसंद नहीं था I फिर शांत होते हुए बोले, ” छोड़ो, सब भूल जाओ। जो हुआ सो हुआ। बैठो और इस यज्ञ के हवन कुंड में आहुति दो। “सबके सामने सती अपने पति की ‘निंदा’  व ‘अपमान ‘ सुनकर क्रोध और लज्जा से मूक खड़ी रहीं। उन्होंने सोचा, अपने पति का अपमान व निंदा सहने से तो अच्छा मेरा मर जाना ही है।

यह विचार आते ही वह अपने पिता के तरफ मुड़ी, और कहा, “तुम अहंकारी और पापी हो! मुझे आपको पिता कहते हुए भी लज्जा आ रही है क्योंकि मुझे यह शरीर आप ही से प्राप्त हुआ है, अतः मैं इस शरीर का अभी त्याग कर रही हूँ। ” ये कहकर सती ने अपनी आंखे बंद कर लीं। उन्होंने मन ही मन शिवजी को याद किया और उनसे दोबारा जन्म लेने का वादा किया।

इसके बाद वो यज्ञ के हवन कुंड में कूद गईं। अग्नि कुंड में सती को स्वाहा होते देख चारों तरफ हाहाकार मच गया और रोने चिल्लाने की आवाज़ सुनाई पड़ने लगी। ये आवाज़ सुनकर बाहर खड़े नंदी के साथ सभी शिव गण दक्ष के तरफ दौड़े। परंतु भृगु ऋषि ने अपने मंत्रों द्वारा हज़ारों शक्तिशाली दैत्य उत्पन्न कर शिव गणों को पराजित कर दिया। शिव गण पराजित होकर कैलाश लौट आए और शिवजी को पूरी घटना वृतांत सुनाए।

यह सुनकर शिवजी को अत्यंत क्रोध आया। उन्होंने अपनी जटा के बालों का एक गुच्छा तोड़कर जमीन पर पटक दिया। वह दो भागों में टूट गया। उस गुच्छे के एक भाग से वीरभद्र और दूसरे भाग से भयंकर काली प्रकट हुईं। उनके प्रकट होते ही शिवजी ने दोनों को दक्ष का नाश करने के लिए आदेश दिया। यह सुनकर वीरभद्र और महा काली अपनी सेना लेकर दक्ष के निवास स्थान पर गए।

तभी अचानक आकाश में एक आकाशवाणी हुई, ” दक्ष , तुम पर बहुत बड़ी विपदा आने वाली है! अब तुम्हारा अंतिम समय बहुत ही निकट है! ” तभी उन्होंने देखा कि भगवान शिव की सेना उनकी तरफ चली आ रही है। शीघ्र ही उन्होंने यज्ञ के समारोह को आंधी तूफ़ान की तरह तहस नहस कर डाला।वहां उपस्थित सभी लोग अपना प्राण बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे।

राजा दक्ष के घमंड का अंत 

वीरभद्र के नर संहार से कोई बच नहीं पाया। तभी दक्ष ने बचने के लिए इन्द्र से सहायता मांगे| इंद्र दक्ष की सहायता हेतु तत्काल हाजिर हुए। भृगु ऋषि ने भी दैत्यों को उत्पन्न किया परंतु इस बार उनकी सारी शक्तियां व्यर्थ गईं। जिसमें इन्द्र और नन्दी के बीच घमासान युद्ध हुआ। इस युद्ध में नंदी को चोट लगी वह बेहोश हो गया। शिव के प्रिय नंदी की य़ह दशा देखकर वीरभद्र क्रोधित हो गए और इंद्र पर तीर छोड़ा। परन्तु, इंद्र वहां से नौ दो ग्यारह हो गये।

इसके बाद वीरभद्र दक्ष की तलाश में चल पड़े। वीरभद्र कुछ ही देर में दक्ष को ढूढ़ निकाले और उनका सिर काटकर अग्नि कुंड में फेंक दिए। वीरभद्र और महाकाली अपना काम पूरा कर कैलाश लौट आए। इधर यज्ञ के अपूर्ण रह जाने से ब्रह्मा और विष्णु चिंतित थे I उन्हें डर था कि यज्ञ का अपूर्ण रहना तीनों लोकों के लिए अच्छा नहीं है। इस विषय पर सभी देवताओं ने आपस में विचार किया।” हमें शिव के पास जाकर इस विषय पर बात करनी चाहिए।

वे आवश्य ही इस समस्या का समाधान निकाल ही लेंगे। ” विष्णु के विचार से सहमत होकर सभी देवता गण तुरंत कैलाश पर्वत पर जाकर शिवजी से प्रार्थना की, “हे भगवन! आप अत्यंत दयालु हैं। दक्ष के अपूर्ण यज्ञ को पूर्ण करने की कृपा करें। अन्यथा परिणाम अच्छा नहीं होगा ! उनकी बात सुनकर भगवान शिव का हृदय करुणा से भर गया। इसीलिए भगवान शिव बोले, ठीक है। दक्ष पुन: जिवित हो जाएगा। परंतु उसका शिर बकरे और धड़ मनुष्य का होगा। “

ये कहकर भगवान शिव दक्ष के निवास पर गए और वहां उन्होंने दक्ष के धड़ को बकरे के सिर से जोड़ दिया। दक्ष धीरे-धीरे उठ कर खड़ा हुआ। दक्ष ने भगवान शिव को झुक कर प्रणाम किया और उनसे अपने दुर्व्यवहार के लिए क्षमा मांगी I फिर उन्होंने अपूर्ण यज्ञ को पूर्ण करने की अनुमति मांगी तो शिवजी ने सहर्ष अपनी अनुमति दे दी। भगवान शिव की कृपा से दक्ष ने सफलता पूर्वक यज्ञ पूर्ण किया।

मेरे प्यारे पाठकों क्रोध सबसे पहले अपना नुकसान करता है। इसीलिए आप सभी से निवेदन है कि क्रोध को सदा अपने वश में रखें।

शिक्षा- क्रोध व्यक्ति को सदैव गर्त की ओर ही ले जाता है, इसीलिए क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए ।

यह भी पढ़ें :

नमस्कार, साथियों मैं Krishnawati Kumari इस ब्लॉग की krishnaofficial.co.in की Founder & Writer हूं I मुझे नई चीजों को सीखना अच्छा लगता है और जितना आता है आप सभी तक पहुंचाना अच्छा लगता है I आप सभी इसी तरह अपना प्यार और सहयोग बनाएं रखें I मैं इसी तरह की आपको रोचक और नई जानकारियां पहुंचाते रहूंगी।

- Advertisement -
- Advertisement -

Stay Connected

604FansLike
2,458FollowersFollow
133,000SubscribersSubscribe

Must Read

- Advertisement -

Related Blogs

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here